राजनीति का हम्माम और नंगे हुक्काम
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   धूं धूं कर जला था वडोदरा

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वडोदरा में हिंसा की सबसे जघन्य वारदात हनुमान टेकड़ी में हुई जहां बेस्ट बेकरी में 14 लोगों को जिंदा जला दिया गया.

जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी 

अगर अहमदाबाद में हिंसा के तांडव का स्वरूप सबसे ज्यादा विकराल था तो गुजरात के दूसरे सबसे बड़े शहर वडोदरा में भी हैवानियत अपना कहर बरपा रही थी. यहां खूनी खेल 27 फरवरी को ही शुरू हो गया था जो चरणबद्ध तरीके से दो मई तक चला. इस दौरान हुई सबसे जघन्य वारदात में एक मार्च को हनुमान टेकड़ी स्थित बेस्ट बेकरी में 14 लोगों को जिंदा जला दिया गया. मुसलमानों का कोई इलाका ऐसा नहीं था जो हिंसा से अछूता रहा हो. 28 फरवरी की सुबह शहर के हिंदू बहुल इलाके सामा में भीड़ ने वडोदरा के गणमान्य लोगों में गिने जाने वाले और महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर जे एस बंदूकवाला के घर पर हमला किया. प्रोफेसर और उनकी बेटी ने अपने हिंदू पड़ोसियों के यहां शरण ली. इसके बाद हमलावर वापस चले गए. लेकिन इसके अगले ही दिन हथियारों से लैस भीड़ ने फिर हमला किया और उनके और इलाके में रहने वाले दो अन्य मुस्लिम ब्यूरोक्रेट्स के घरों को फूंक दिया गया.

तहलका ने इन घरों को फूंकने वाले दंगाइयों में शामिल और पेशे से एकाउंटेंट धीमंत भट्ट से मुलाकात की. भट्ट महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में चीफ एकाउंटेंट और ऑडिटर है. वह वडोदरा से बीजेपी सांसद जयाबेन ठक्कर का पीए भी है. भट्ट ने बताया कि साबरमती एक्सप्रेस वाली घटना की रात ही वडोदरा में बीजेपी, संघ, विहिप और बजरंग दल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक बुलाई गई. भट्ट के मुताबिक बैठक में मुसलमानों पर हमले की योजना बनाई गई. इसके साथ ही दंगों के बाद आरोपियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए उनकी कानूनी मदद का खाका भी तैयार किया गया.

तहलका ने वडोदरा के एक और बीजेपी नेता दीपक शाह से मुलाकात की. शाह ने न सिर्फ भट्ट द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि की बल्कि ये भी बताया कि ये बैठक नर्मदा फार्महाउस में हुई थी. शाह ने बाबू बजरंगी के उस दावे की पुष्टि भी की जिसमें कहा गया था कि भगवा संगठनों ने मुसलमानों पर हमला करने के लिए निचली जाति के हिंदुओं का इस्तेमाल किया था.

आशीष खेतान

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 17

  • प्रेषक : Rakesh
    Where were you when they burn 13 People in Mandvi Vadodoara in 1993 or 1992. I dont understand why you post only for muslims, I dont have any objection against, But the truth is both Hindu & Muslims were targeted in any comunal riots..Then why you (REPORTERS) sympothy only muslims....Clarify this & then post any article
  • प्रेषक : Sharif
    Ashish, You are lion's son. Hindu like you are real Hindu. Somehow We muslim never admit whatever wrong we do. I like friend like you. who show us what kind of people you are. you should convert and be one of us.
  • प्रेषक : AHMED
    long live mr.tejpal and tehelka.you are a rial indian.i am proud of you.i am also indian but iam heat gujrati not hindu.me khud gujrati hu.muje gujrati hindu se nafrat hai.
  • प्रेषक : shafiq
    you done a great job, but its little late, although every body konws about the culprits behind this genoside. you put it in paper with some pictures and interviews. What muslims think about it is not important, How hindus react on this whole episode that is more important, I know all hindus are not like these few "men eaters". they should come ahead and apologize. its there duty to save the image of Hindus as peace loving comunity. at least they can put some "marham".
  • प्रेषक : mahesh
    tarun ji please show your indian citizenship .