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   आतंक के गर्वीले सौदागर
गोधरा अग्निकांड के बाद वीएचपी, बजरंग दल और किसी आतंकवादी संगठन के बीच का फर्क ख़त्म हो गया था..वो बम, रॉकेट लॉन्चर्स जैसे नरसंहारक हथियार बनाने और प्रदेश में बांटने का काम कर रहे थे.
| जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी |
विश्व हिंदू परिषद् और इसकी कथित युवा शाखा, बजरंग दल, दो मुख्य दल थे जिन्होंने २००२ में गुजरात में कहीं खून की होली खेली और कहीं आग की लपटों से रौशनी की. कई सामाजिक संस्थाएं और मानवाधिकार संगठन इस बात को मुखर तरीके से उठाते रहे हैं मगर खून और आग का खेल खेलने वाले इन लोगों में से ज्यादातर लोगों के लिए क़ानून शायद उनके आकाओं से ज़्यादा शक्तिशाली नहीं था. बजरंग दल का अंध-हिंदुत्ववादी बाबू बजरंगी, उस अति अल्पसंख्यक बिरादरी का हिस्सा है जिनके ख़िलाफ़ मुकदमा चल रहा है मगर वीएचपी और बजरंग दल के ज्यादातर लोग--खासकर इसकी अगुवा पंक्ति-- अपने हाथों पर खून की एक मोटी परत चढी होने के बाद भी लेश मात्र भी विचलित न तो पहले हुए और न अब ही है. आख़िर हों भी क्यों जब खून की होली खेलते वक्त राज अपने एक बीजेपी नाम के भाई के हाथ में था और बाद में इस भाई की ताकत में और इजाफा इस खूनी खेल की बदौलत ही हुआ. अपनी तहकीकात के दौरान तहलका ने पाया कि कैसे वीएचपी और बजरंग दल के नेताओं ने इस नरसंहार की योजना बनाई थी. इतनी महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देने के लिए उन्हें तलवार, चाकू और त्रिशूल से ज़्यादा घातक और बड़े हथियारों की ज़रूरत थी. उन्हें एक ऐसा शस्त्रागार चाहिए था जो एक या दो करके मारने की मुश्किलों को आसान कर दे. तहलका ने पाया कि किस तरह से वीएचपी और बजरंग दल आतंकवादी संगठनों में तब्दील हो गए थे. वे गोधरा अग्निकांड के बाद आग उगलने वाले हथियारों से लेकर बम और रॉकेट लॉन्चर्स बना रहे थे और अपने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों में भी बांटे चले जा रहे थे.
एक नज़र में
हरेश भट्ट, 2002 में बजरंग दल का राष्ट्रीय सह संयोजक था और वर्तमान में गोधरा से भाजपा का विधायक है. अग्निकांड से पहले गोधरा कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. भट्ट ने तहलका के कैमरे के सामने स्वीकार किया कि कैसे उसकी पटाखे बनाने वाली फैक्ट्री में बम और दूसरी देसी लेकिन ज़्यादा नुकसान पहुंचाने वाली चीज़ें जैसे कि रॉकेट लॉन्चर्स वगैरह बनाई गईं. ये सारा मौत का सामान बाद में उस भीड़ को बाँट दिया गया जिसके सर पर खून सवार था. भट्ट के मुताबिक भीड़ की ऐसी मनःस्थिति बनने के जिम्मेदार भी वोही लोग थे.
2002 में कर्फ्यू लगे होने के बावजूद, न केवल पंजाब से भारी मात्रा में तलवारें मंगाई गईं बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से भी आग उगलने वाले हथियार गुजरात में लाये गए. भट्ट के मुताबिक हथियारों के ये ज़खीरे एक नहीं बल्कि कई-कई बार, कई-कई राज्यों की सीमाओं के इधर-उधर किए गए.
एक अलग सन्दर्भ में भट्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया. भट्ट के मुताबिक उसने 40 लोगों को प्रशिक्षण दिया था जो बाद में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए 1992 में अयोध्या भेजे गए थे. इन 40 लोगों को आर्मी की तरह का प्रशिक्षण दिया गया था जिसमें कई तरह की बाधाओं को पार करने वाला और रस्सी की मदद से 30 फीट तक चढाई करने का कोर्स भी शामिल था. ये कैम्प गुजरात में आज भी मौजूद है.
वीएचपी के धवल जयंती पटेल अपनी साबरकांठा की खदानों में डाइनामाइट का इस्तेमाल करते थे. एक पुराने संघ के सदस्य, अमरुध पटेल की मदद से, जो कि बम बनाने में निपुण था, पटेल की खानों में ही डाइनामाइट और आरडीएक्स के चूरे की मदद से बम बनाए गए.
वीएचपी के विभाग प्रमुख अनिल पटेल भी तफसील से बताते हैं कि कैसे साबरकांठा में विस्फोटक बनाए गए और कैसे उन्हें अहमदाबाद में सप्लाई किया गया.आशीष खेतान
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कुल टिप्पणियां: 10
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प्रेषक : RC Sharmamaine bhi dekha tha. Kisine ne bhi Modi ka naam nahin liya. Sabne apne aap to he implicate kiya hai. S6 ko 27 ko jalya, dange 28 ko shuru huey, ek tarikh ko Sena march kar rahi thee. Tejpalji batange 3 din kahan se aaye?? Kya February mein 31 din hote hain?? Well done, Tejpalji, you are publishing a murder call.
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प्रेषक : MusalmanOnly one demand if anybody can kill MODI the PIG
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प्रेषक : Sirf ek InsaanTarun ji sirf ek baat ap se kehna chahta hun plz ho sake to baata dijiye Election to modi ji ko he jitna hay kiyonki itna zeher wo logon main phaila chuke hain ki aaj tak bhi us ka asar phail he raha hay Tarun ji ap ko insaniyat ka wasta aj bhi log dur or khauf kay saiye main ji rahy hay aj bhi un ki halat itni kharab hay ki sharam ati hay ap ko batane main or ap se kuch chupa to hoga nahi isliye main ap se ummeed karta hun kuch aisa kijiye k un logon ko bhi sukun or araam ka sans lay saken
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प्रेषक : UnknownKuch der pahle Aaj tak par Sanjay Singhal aur Tarun Tejpal Ka Conversation sun rahatha.Singhal is tarah se in sab repot ko jhoot sabith karna chah raha tha jaise itna kucch hone ke baad bhi kucch nahi hua. Main sif apne deshwasio se yeh kehna chahta hoon ki Muslaman aur Hindu dono ko hi ek dusre ki ahmiyot India ki growth ke liye utilize karna chahiye.
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प्रेषक : the onesanjay akal kya ghaas charne gai hai anaaj hi khate ho ya janwaron ka chaara ek insan yadi dusren insaan ko katega to insan aur janwar mein anter kya rah jayega, RUSSIA ke Stalin ke marne ke kai saalon ke baad uske kale karnamon ka pata chala is karan se uske gunah kam nahi ho jaate, jis tarah pyar ka koi anth nahi hota waise hi nafrat ka koi anth nahi hota hai, yahan jitne bhi comment bheje gaye hai sabhi mein kewal nafrat hai, yeh in sab ko kabhi khatam nahi hone dega, yeh jo kuch bhi hua sab political faide ke liye kiya gaya ye sabhi jante hai, koi ek aisa aam insan mujhe bataa do jiska in sab se faida hua ho, koi bhi neta kisi bhi dango mein mara aajtak sirf begunah martein hai, shuturmurg ki tarah ret mein gardan chhupa lene se sachhai ko nakar nahi sakte, BE A HINDU,BE A MUSLIM, BE AN INDIAN but first try to be 100% HUMANITY, aadmi nahi insaan bano
























