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   वर्दी वाले हत्यारे
अनदेखी करने से लेकर मुसलमानों पर हमला करने तक पुलिस ने हर वो काम किया जिसका नतीजा गुजरात के दो हज़ार मुसलमानों की मौत के रूप में सामने आया.
| जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी |
2 मार्च 2002 की शाम करीब छ बजे, हिन्दुओं की एक भीड़ भावनगर जिले के घोघा रोड पर स्थित एक मदरसे पर हल्ला बोलती है. मदरसे में करीब दो सौ मुस्लिम बच्चे शरण लिए हुए हैं. इससे पहले कि भीड़ मासूम बच्चों का कुछ कर पाती भावनगर के पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा गोली चलाने का आदेश दे देते हैं. बच्चे बच जाते हैं. अगले दो हफ्तों तक पुलिस ऐसे साहसिक कार्य कई और जगह भी दोहराती है. 16 मार्च तक भावनगर में पुलिस फायरिंग में मरने वालों की संख्या 8 हो जाती है जिनमें 5 हिंदू भी शामिल हैं. पुलिस की समय पर की गई कार्यवाही की वजह से जिले में ज्यादातर शान्ति ही रहती है. मगर १६ मार्च की सुबह अचानक शर्मा के पास राज्य के गृहमंत्री गोर्धन ज़डफिया का फ़ोन आता है.
"ज़डफिया ने कहा कि हालांकि मेंने अच्छा काम किया है मगर पुलिस की गोलियों से मरने वालों का अनुपात ठीक नहीं है--वो मरने वालों में हिन्दुओं के जाया होने की शिकायत कर रहे थे. मैंने उनसे कहा कि सब कुछ परिस्थितियों और भीड़ के ऊपर निर्भर करता है." ये बात शर्मा ने नानावती शाह आयोग के सामने पेश होने पर कही. शर्मा ने आयोग को ये भी बताया कि जब उन्होंने 1 मार्च 2002 को पुलिस महानिदेशक के चक्रवर्ती को फ़ोन कर उनसे और ज़्यादा पुलिस बल की मांग की तो उनका कहना था कि " हालांकि वो एक राज्य आरपीएफ की टुकडी अगले दिन भेज देंगे मगर मुझे और ज़्यादा मदद की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए क्योंकि राज्य की ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह से बिक चुकी है."
गृहमंत्री और पुलिस महानिदेशक के साथ शर्मा के ये दो वार्तालाप साल 2002 के दंगों के दौरान पुलिस की भूमिका का सही-सही अंदाजा दे देते हैं.
मौत-मौत चिल्लाने वाली भीड़ को उकसाने से लेकर, उन्हें हथियार मुहैया कराने, बमों को इधर उधर पहुंचाने और पहले से ही अधमरे मुस्लिमों पर गोलियां तक पुलिस ने वो सब किया जो नरसंहार के लिए ज़रूरी था.
सब कुछ दबा ढका था मगर तहलका की तहकीकात में दंगाइयों और षड्यंत्रकारियों ने वो सब कुछ कहा जो इस दिल-दहला देने वाली मिलीभगत का पर्दाफाश करता है.
एक नज़र में
अहमदाबाद के तब के पुलिस आयुक्त पी सी पण्डे, जिन्हें हाल ही में पुलिस महानिदेशक के पद से निर्वाचन आयोग के आदेश पर हटा दिया गया है, ने आदेश दिया था कि 700-800 मृतकों को नरौदा पटिया से लाकर अहमदाबाद में कई जगहों पर फेंक दिया जाय. ऐसा उन्होंने नरौदा पटिया में हुए नरसंहार की गंभीरता को कम करने के लिए किया था.
बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी के मुताबिक उसने आत्म समर्पण तब किया जब मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे ऐसा करने के लिए कहा. पुलिस सह आयुक्त पी पी पाण्डे ( क्राइम ब्रांच) ने उसे गिरफ्तार करते वक्त कहा था कि ये सब दिखावा है.
कागजों में पुलिस अधीक्षक एन डी सोलंकी ने एक स्थानीय संघ के नेता को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था मगर असल में उसको वीएचपी के ऑफिस में भेज दिया गया था.
तत्कालीन पुलिस महानिदेशक गडवी ने कालूपुर के जिला मंत्री रमेश दवे से वादा किया था कि वो "कम से कम 4-5" मुसलमानों को मारेंगे अगर दवे उनकी तरफ़ इशारा कर देता है. दवे उन्हें एक मकान में ले गया जहाँ कुछ मुसलमान थे. दवे के मुताबिक "इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते गडवी ने उन्हें मार दिया"इंसपेक्टर के जी इर्दा ने गुलबर्ग सोसाइटी के बाहर इकठ्ठा भीड़ से कहा था कि उनके पास अपना काम करने के लिए तीन घंटे हैं. उसके बाद भीड़ पागल हो गयी. एक आदमी को तो इर्दा की आंखों के सामने ही काट दिया गया.
इर्दा ने वीएचपी के कार्यकर्ताओं से मुसलमानों को ले जा रही एक गाडी को आग लगाने के लिए कहा. उसने कहा कि गाडी के साथ जा रहा सिपाही भाग जायेगा. "सारा मामला यहीं ख़त्म हो जायेगा और किसी के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज करने का सवाल ही पैदा नहीं होगा."
आशीष खेतान
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कुल टिप्पणियां: 14
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प्रेषक : Junaid Ahmedmain tehalka ko itni acchi tehkikat ke liye badhai deta hoon. aur meri subkamnaye bhi tehalka ke saath hai. "jab pada waqt gulistan par to khoon humne diya, jab aayi bahar to wo kehte hai tumhara kaam nahi" Main bas itna kehna chachta hoon ki sabse bada rishta to insaniyat ka hota hai. Jo is rishte ko hi choor de uska koi dharm nahi hota. aur iske baad bhi wo apne aap ko dharm se jode wo insaan nahi saitan hai. aur shaitano ka basera duniya nahi Jehannam hai. Beshak Allah inhe inke asli makam tak jald pahucha dega.
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प्रेषक : Kaifgujrat mein jo nahin hona chahiye tha wo kar dikhaya wahan ki modi sarkarne. Par kya hamare desh ka Qaanoon itna lachar ho gya hai ki in samaj ke dushmanon ko koi saza na depaye, kya hamare desh ka qanoon sirf aur sirf politicians ki hi taraf dari karega.... kyn koi insaaf pasand paida nahin hota hamare desh mein jo in insaniyat ke dushmanon ke khelaf unhen saza de sake... par nahin ye sab to nahin hone wala INDIA mein ab to sirf Musalmano ka mazaq hi udaya jayega, unke sampatti ki loot paat hogi, unki izzat ke saath khilwad kiya zayega.....mujhe to yahi lagta hai....... bas.. waise thanks to mr. tejpal and his team to bring the truth to us
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प्रेषक : muhasinIn kafiron ne musalmanoo pe zulam kiya , allah is ka badla inhe zaroor de ga, uper wale ki lathi main awaz nahi hoti hai.
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प्रेषक : Md.Tanveersab se pahle mai aap ki puri Tahelka team ko shubh kaamnaen deta hoon.Aur Unki himmat aur bebaki ko salaam karta hoon. Meri rai yeh hai ke agar aise hi sarkari karam cahri jurm ko rokne ke bajaae khud mujrimo ka saath de to phir Bharat nahi Bharat ka Baigan ka Bhurta ho jaaega. "EK HOTO BAN SAKTE HO (Khursheed wa Mubbee) SURYA PARKASH. WARNA IN BHIKRE HUE *****(TARO) SE KIYA BAAT BANE." Nirankar Ishwar Aap ko Sarshwat,Sanatan i.e. ISLAAM Ki Shiksha ki samajh de........
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प्रेषक : MusalmanEverybody knew that behind all this riots there is only one person MODI the (gujrati Fucker). He is not Indian. He Must Be Killed Now to stop any more crimes against Indian Muslim.
























