नरेन्द्र मोदी : बेपरवाह आलमपनाह या सर्वसूत्रधार
एक के बाद एक हर आरोपी का कहना है कि कत्ल-ए-आम सम्भव ही नहीं हो पाता अगर नरेन्द्र मोदी ने प्रशासन की लगाम दूसरी तरफ़ न घुमाई होती.
| जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी |
इससे जुड़े और दूसरे अध्यायों से स्पष्ट है कि कैसे वीएचपी और बजरंग दल ने सोची-समझी योजना बनाकर नरसंहार को अंजाम दिया, कैसे साबरमती एक्सप्रेस में अग्निकांड की ख़बर मिलने के बाद बड़े पैमाने पर कत्ल और लूटपाट शुरू हुई और कैसे इन सब को करने के लिए विभिन्न भगवा संगठनों के कार्यकर्ताओं के जत्थे बनाए गए. इसके अलावा पुलिस की इतने बड़े नरसंहार को रोकने में नाकामी और अनदेखी ही नहीं बल्कि भागीदारी भी स्पष्ट हुई. ये भी खुलकर सामने आया कि कैसे प्रौसीक्युशन ने मुजरिमों को सज़ा दिलाने की बजाय बच गए निरीह लोगों को कभी लालच और कभी धमकी देकर मामलों को दबाने की कोशिशें कीं.
ऐसा बीजेपी सरकार और इसके दाएं-बाएं वीएचपी और बजरंग दल द्वारा कई स्तरों पर किया गया. अब सवाल उठता है कि क्या कोई रिंगमास्टर था जिसके इशारे पर ये सब हो रहा था या ये सब कुछ अनियोजित था? क्या कोई अनजाना हाथ था जो पीछे से सारे खिलाडियों को संचालित कर रहा था?
जिस राज्य के सभी घटक जहाँ हिस्सा रहे हों एक घिनौने नरसंहार में, उस राज्य पर राज करने वाले की भूमिका कितनी रही इसमें? क्या मोदी ही कारण थे पुलिस की आपराधिक अनदेखी और भागीदारी के लिए?
क्या उन्होंने ही खून के प्यासे बाबू बजरंगी, हरेश भट्ट और अनिल पटेल जैसे वीएचपी और बजरंग दल के नेताओं को किसी भी हद तक जाने का इशारा किया था?
तहलका ने ये सब सुनिश्चित करने का प्रयास किया और जो कुछ सामने आया वो वैसे का वैसा ही सामने है.
एक नज़र में
नरेन्द्र मोदी का गुस्सा खुलकर सामने आ गया था, उन्होंने बदला लेने की कसम खाई. बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक हरेश भट्ट उस बैठक का हिस्सा थे जिसमें मोदी ने भगवा ब्रिगेड से कहा था कि उनके पास तीन दिन हैं और वो इन तीन दिनों में जो चाहे वो कर सकते हैं. उसके बाद भट्ट कहते हैं "उन्होंने हमसे रुकने को कहा और सब कुछ थम गया."
वीएचपी की अहमदाबाद इकाई के शहर अध्यक्ष राजेन्द्र व्यास को मोदी ने ये कह के सांत्वना दी " ख़ुद को शांत रखो बाकी सब देख लिया जायेगा.
"मोदी सरकार ने भीड़ को महज़ कुछ भी करने की छूट ही नहीं दी बल्कि आरोपियों को क़ानून से बचाने का हरसंभव प्रयास भी किया. मोदी ने स्वयं ही नरौदा पटिया मामले के मुख्य अभियुक्त बाबू बजरंगी के माउन्ट आबू में रहने का इंतज़ाम किया. साथ ही मोदी ने बजरंगी को बचाने की खातिर दो जजों को ट्रांसफर भी कराया.
नरौदा पटिया के नरसंहार के बाद मुख्यमंत्री ख़ुद ही वहाँ पहुंचे और छारा जनजातियों के प्रयासों की सराहना की. दरअसल इन लोगों ने नरौदा पटिया के भीषण नरसंहार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था.
सरकारी वकील अरविंद पांड्या का विश्वास है कि गोधरा के बाद का फसाद मोदी के मज़बूत नेतृत्व की वजह से ही सम्भव हो सका था.
आशीष खेतान
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कुल टिप्पणियां: 58
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प्रेषक : arjunI agree Free media should be free from bias and should not misguide people.
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प्रेषक : abdulashish who paid to write this lie.why you not faithful to our country. free media can write any thing?
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प्रेषक : musaashish you are biggest liar
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प्रेषक : sarfaraz saifiआशीष जी,आपने जो खवर दिखाइ वो वाक्य एक कड़वा सच थी । ये खवर मोदी एडं कम्पनी कभी नही भुलेगी लेकिन असली मजा तो तब आयेगा जब मोदी की सरकार इस बार गुजरात मे नही बनेगी।
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प्रेषक : khalidwhat are you tring to accomplish with this big lie? I do not belive any thing from this






















