गुजरात 2002 : खौफनाक सच्चाई
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 कृपया संदेश पर ध्यान दें
 
तहलका ने गुजरात नरसंहार की पीछे की सुनियोजित योजना और इसमें राज्य सरकार की भूमिका का पर्दाफाश किया तो तहलका के मकसद पर सवाल उठातीं बौखलाहट भरी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. 26 अक्टूबर को एक संवाददाता सम्मेलन में तहलका संपादक ...
 पढ़ें और पढ़कर डरें
 
आउसवित्स के नाज़ी कैम्प में ईंटों की बैरक कतारों में बड़ी सफाई से बनी हुई हैं. शान्ति इतनी गहरी कि सिर्फ़ मृत्यु में ही ढूँढी जा सकती है. साफ-सुथरे रास्ते एक-दूसरे को समकोण पर काटते हैं और पेड़ भव्य किंतु ...
 सम्पादकीय : ताकि याद रहे ये शर्म
 
तहलका में हम सबके लिए ये हमारे दौर की सबसे अहम तहकीकात है. कुछ लोग इससे सहमत नहीं होंगे लेकिन कई मायनों में इस तहकीकात की अहमियत ऑपरेशन वेस्ट एंड से भी ज्यादा है. रक्षा सौदों में भष्ट्राचार के भंडाफोड़ ...
 दो जहां के बीच का मुसाफिर
 
छ महीने तक गुजरात में अपनी असलियत के उलट एक उग्र हिंदूवादी कट्टरपंथी का चोला ओढ़कर रहने वाले आशीष खेतान, गुजरात नरसंहार के पीछे के सच की उनकी खोज में आने वाले उतार-चढावों को याद करते हैं... नाश्ता खत्म कर ...
 दंगाई कठपुतलियाँ और नचाने वाले हाथ
 
योजना बनाने वाले लोग थे और उन्हें अंजाम देने वाले. सब कुछ सोच-समझ कर किया गया था और ये सब कुछ था सामूहिक हत्या, लूट और बलात्कार. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी गोधरा अग्निकांड के बाद गुजरात में जो कहर बरपा ...
 अहमदाबाद : नरसंहार की राजधानी
 
नरौदा, गुलबर्ग, कालूपुर और दरियापुर में हथियारों से लैस, खून की प्यासी भीड़ ने वो सब कुछ किया जो संघ परिवार चाहता था. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी मौत का सबसे ज्यादा हौलनाक खेल अहमदाबाद के नरौदा गाँव और नरौदा पटिया ...
 धूं धूं कर जला था वडोदरा
 
वडोदरा में हिंसा की सबसे जघन्य वारदात हनुमान टेकड़ी में हुई जहां बेस्ट बेकरी में 14 लोगों को जिंदा जला दिया गया.जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी अगर अहमदाबाद में हिंसा के तांडव का स्वरूप सबसे ज्यादा विकराल था तो गुजरात के ...
 साबरकांठा : आग ही आग
 
भीड़ चिल्ला रही थी कि दरवाजा बाहर से लॉक कर दो और मुसलमानों को भीतर ही जलाकर मार दो. अगर मुसलमानों को हुए आर्थिक नुकसान की बात की जाए तो ये सबसे ज्यादा साबरकांठा जिले में हुआ. यहां सैकड़ों मकानों और ...
 आतंक के गर्वीले सौदागर
 
गोधरा अग्निकांड के बाद वीएचपी, बजरंग दल और किसी आतंकवादी संगठन के बीच का फर्क ख़त्म हो गया था..वो बम, रॉकेट लॉन्चर्स जैसे नरसंहारक हथियार बनाने और प्रदेश में बांटने का काम कर रहे थे. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी विश्व हिंदू ...
 वर्दी वाले हत्यारे
 
अनदेखी करने से लेकर मुसलमानों पर हमला करने तक पुलिस ने हर वो काम किया जिसका नतीजा गुजरात के दो हज़ार मुसलमानों की मौत के रूप में सामने आया. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी 2 मार्च 2002 की शाम करीब छ ...
 नरेन्द्र मोदी : बेपरवाह आलमपनाह या सर्वसूत्रधार
 
एक के बाद एक हर आरोपी का कहना है कि कत्ल-ए-आम सम्भव ही नहीं हो पाता अगर नरेन्द्र मोदी ने प्रशासन की लगाम दूसरी तरफ़ न घुमाई होती. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी इससे जुड़े और दूसरे अध्यायों से स्पष्ट है ...
 तार-तार क़ानून
 
निचली अदालत दंगों से पहले ही संघ ने आरोपियों को बचाने का इंतजाम कर लिया था. न्याय-अन्याय की कानूनी लड़ाई में न्याय के पक्ष में खड़े दिख रहे योद्धा असल में अन्याय की तरफ से लड़ रहे थे. जिन्होंने किया, उन्हीं ...
 नरौदा पाटिया : हैवानियत का चश्मदीद
 
नरोदा पाटिया में नरसंहार शुरू करने में भी तेजी दिखाई गई और उस पर पर्दा डालने का अभियान चालू करने में भी. दोषी अब भी बगैर किसी सजा के डर के बेपरवाह घूम रहे हैं. साबरमती एक्सप्रेस त्रासदी के कुछ ...
 गुलबर्ग सोसाइटी : खौफ की पनाहगाह
 
गुजरात नरसंहार की पांच महीने लंबी तहकीकात में कई दंगाइयों और षडयंत्रकारियों ने नरसंहार में अपनी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया. लेकिन एक जगह फिर भी अनछुई रह गई थी. ये जगह थी अहमदाबाद के पूर्वी हिस्से में ...
 गोधरा : झूठ का पुलिंदा
 
झूठ का पुलिंदा एक नज़र में27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के 7:30 बजे गोधरा स्टेशन पहुंचने तक माहौल में कोई अपशकुनी छाया नहीं थी। वापस जाती सर्दियों का हल्का अहसास अब भी था, और देश भर के लोगों के ...
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