उजला भारत
साथ रहने का शऊर
उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर जिले के दो गांव अपने नामों और आबादी के समीकरण के कारण ध्यान खींचते हैं. रेयाज उल हक की रिपोर्ट
जो तैरे धारों के विपरीत
वे दलित परिवार में पैदा हुए थे इसलिए कदम-कदम पर सामाजिक तिरस्कार और तमाम दूसरी मुश्किलें उनकी नियति थी. बावजूद इसके उन्होंने हौसला नहीं खोया...फिर गूंजा जीवन का कलरव
भरतपुर में न पानी बचा था, न मछलियां और नतीजतन न पक्षी. मगर सूझ-बूझ भरी कोशिशों के चलते इस पक्षी अभ्यारण्य में जिंदगी फिर से लौट आई है. प्रेरणा सिंह बिंद्रा की रिपोर्ट...भूल बना विलायती बबूल
जिस विलायती बबूल को सरकार ने रेगिस्तान की समस्या का इलाज करने के लिए इजराएल से मंगवाया था वो अब गुजरात के कच्छ जिले में कई समस्याओं की वजह बन गया है. ...थोड़े हिंदू, थोड़े मुसलमां, पूरे इंसां
नसीब खान ने हाल ही में अपने बेटे प्रकाश सिंह की शादी राम सिंह की बेटी गीता से की. तीन महीने पहले हेमंत सिंह की...हरी वादियों का चितेरा
अस्सी के दशक की शुरुआत से ही एक अकेले व्यक्ति के शांत प्रयासों ने ऐसे ग्रामीण आंदोलन की नींव रखी जिसने उत्तराखंड की बंजर पहाड़ियों...अंधेरे में ज्ञान का जुगनू
राजस्थान के इस गांव में नाम भर को पढ़ा लिखा एक चरवाहा, बिना किसी सरकारी या दूसरे सहयोग के रात के अंधेरे में ज्ञान की रोशनी फैला रहा है....संपूर्णता को अभ्यासरत
पांच साल की छोटी सी उम्र में एक हादसे के शिकार पूरन चौहान ने अपनी शारीरिक अक्षमता को कभी अपनी ज़िंदगी की राह का रोड़ा नहीं बनने दिया. ...- काले कर्मों वाले बाबा
- आतंक के मोहरे या बलि के बकरे ?
- कब जागेंगे हम?
- कितनी लंबी यात्रा
- ख़ूबसूरत लड़कियां
kale karmon vale baba ki hakikat ojagar karne ke liye thanx TAHELKA
thlka me parkasit aalekh pathniy hi
narendra sharma
Dear Sir,
I want to have a back issue [2011] of your esteemed magazine: TEHELAKA Hindi, dated August 31, 2011 [Vol 3 issue 16]. I would ...
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Your post is very knowledgeable and helpful, thanks for sharing such a great post...


