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समाज और संस्कृति

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'...कह सकते हैं कि हम सिस्टम के सामने नहीं झुकेंगे.'

टाटा समूह का अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद अब रतन टाटा की ज्यादातर सुबहें अपने पालतू कुत्तों के साथ खेलते, संगीत सुनते और वे सारी
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‘बुलाया जाएगा तो हम फिर से आएंगे’

भारतीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के सालाना जलसे भारतीय रंग महोत्सव (भारंगम) में इस बार मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मंटो पर विशेष प्रस्तुतियां दी जानी थीं....
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मिसाल और मलाल

किन्नर होने के बावजूद उन्होंने परंपरा से अलग चलने का फैसला किया. जोखिम लेकर और संघर्ष करते हुए अपनी एक अलग राह बनाई. नतीजा यह है कि आज उनकी कहानियां मिसाल हैं. हालांकि इस मिसाल में एक मलाल भी छिपा है. प्रियंका दुबे की रिपोर्ट....
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ये चिराग बुझ रहे हैं...

बुरहानपुर का मुजरा और उसके साथ गायन, नृत्य और तहजीब की एक समूची परंपरा खत्म होने के कगार पर है. प्रियंका दुबे की रिपोर्ट....
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लछमन सम नहीं कोऊ

वीवीएस लक्ष्मण को उनकी कलाइयों के जादू के लिए ही नहीं, उस शालीनता के लिए भी याद किया जाएगा जिसमें जरा भी दिखावा नहीं था. सुरेश मेनन की रिपोर्ट....
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परिणीति की परीकथा

इशकजादे से मुख्य भूमिका में आईं परिणीति में आखिर ऐसा क्या है जिसने उनकी पहली फिल्म लेडीज वर्सेज रिकी बहल के औसत प्रदर्शन के बावजूद उन्हें हिट करा दिया. निशिता झा की रिपोर्ट...
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हम जैसा बोलने वाला एक कवि

  सोपान जोशी इतने लिखने वाले कभी नहीं रहे जितने आज हैं. पढ़ने की सामग्री भी इतनी कभी नहीं रही. छपना-छपाना तो लिखने से भी सरल हो...
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‘किताब की कीमत में लेखक की कोई भूमिका नहीं होती`

असगर वजाहत ने बीते एक दशक में दुनिया को यात्राओं के जरिए समझा है. अंतिका प्रकाशन से उनकी किताब ‘रास्ते की तलाश में आई है....
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...तो मैं तुमसे प्रेम नहीं कर पाऊंगी

 (इस लेख में 'मैं' आज के भारत में रहने वाली एक सचेत, जागरूक और संवेदनशील स्त्री है. प्रेम और देह को लेकर इस स्त्री की...
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