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समाज और संस्कृति

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...तो मैं तुमसे प्रेम नहीं कर पाऊंगी

 (इस लेख में 'मैं' आज के भारत में रहने वाली एक सचेत, जागरूक और संवेदनशील स्त्री है. प्रेम और देह को लेकर इस स्त्री की
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इजहार-ए-इश्क का फच्चर

अलग-अलग दौर में इजहार-ए-मोहब्बत के तरीकों और उनकी खूबियों-खामियों के बारे में बता रहे हैं अनूप मणि त्रिपाठी...
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प्रेम, राजनीति और नेहरू-गांधी परिवार

भारतीय राजनीति के शीर्ष पर खड़ा एक ऐसा परिवार जिसने अकसर राजनीति के आगे प्रेम को तरजीह दी. प्रियदर्शन का आलेख...
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' मेरी फिल्म पसंद नहीं आई तो आपको बाद में कभी कॉफी पिला दूंगा'

फिल्म समीक्षक से फिल्म निर्देशक बने सुधीश कामथ की नई फिल्म गुड नाइट, गुड मॉर्निंग देखना ऐसा अनुभव है मानों आप चोरी‌छिपे एक लड़के और...
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प्रेम रोग है या संजीवनी ?

प्रेम नामक पेचीदा पहेली की साहित्यिक, सामाजिक और डॉक्टरी पड़ताल कर रहे हैं ज्ञान चतुर्वेदी...
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राजनीतिक विरासत फिल्मी ख्वाब

राजनीतिक परिवेश से आने वाले अभिनेताओं में हाल में शुमार हुए चिराग पासवान के फिल्मी सपनों, राजनीति में आने की संभावनाओं और पहले दलित स्टार होने के एहसास के बारे में बता रहे हैं शुभम उपाध्याय ...
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सिनेमाई समझ वाला रॉकस्टार

आखिर वे कौन-सी खासियतें हैं जिनकी वजह से रणबीर कपूर नये सितारों की पांत में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं? बता रहे हैं गौरव जैन...
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आसमान में धान बोने वाले विद्रोही कविता की नयी खेती कर रहे हैं

विलक्षण कवि और उससे भी विलक्षण व्यक्ति रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ से परिचित कराता अवधेश त्रिपाठी का आलेख...
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गोदान : किसान की शोकगाथा

‘गोदान’ के प्रकाशन के 75 साल पूरे हो गए हैं लेकिन भारत का देहाती जीवन आज भी लगभग उन्हीं समस्याओं और चुनौतियों से घिरा दिखता है जिनका वर्णन मुंशी प्रेमचंद के इस कालजयी उपन्यास में हुआ है. गोपाल प्रधान का आलेख ...
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जीवन के संघर्ष को स्वर देता फिल्मकार

सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता मेघनाथ की दो फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के मौके पर उनके व्यक्तित्व के विविध पहलुओं से रूबरू कराती अनुपमा की रिपोर्ट...
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