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कैसे मानें वो हैं हमारे?
जब बात चले हमारी, वो सोएं पांव पसारे. पूरा पढें... |
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'भारत की ठसक चीन से ज्यादा होगी'
अर्थव्यवस्था के मामले में भले ही भारत, चीन की बराबरी न कर पाए मगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी ठसक आने वाले समय में चीन से ज्यादा होगी, ये कहना है जाने-माने आर्थिक जानकार, अमेरिकी थिंक टैंक के सदस्य और 13 सालों तक विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका द इकॉनॉमिस्ट के संपादक रहे बिल एमॉट का. अपनी हालिया किताब में बिल ने बताया है कि चीन, भारत और जापान की प्रतिस्पर्धा आने वाले दशक के स्वरूप को किस तरह प्रभावित करेगी. अजित साही से बातचीत में बिल ने इससे जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की ... पूरा पढ़ें ...

 कर्नाटक का चुनावी रंगमंच 
पूरे कर्नाटक का चक्कर लगाने के बाद भी वहां चुनावों की कोई सरगर्मी नज़र नहीं आती। पार्टियों के झंडे, बैनर, पोस्टर और चुनाव सामग्री दूर-दूर तक नहीं दिखती। इस तरह के चुनावी अभियानों पर इस बार चुनाव आयोग ने शिकंजा ...
 पथरीली डगर, पथिक अग्रसर 
अपने आलोचकों और सलाहकारों की अनदेखी कर वो वहां जा रहे हैं जहां शायद अब कोई नहीं जाता. वो कर रहे हैं जो शायद अब कोई नहीं करता. आम आदमी की तो बात ही क्या बड़े-बड़े राजनीति के धुरंधर भी इससे अचंभित ...
 'अभी आरक्षण में आरक्षण क्यों नहीं है?' 
महिला आरक्षण पर मिहिर श्रीवास्तव से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी का कहना था कि ऊंचे स्तर के जन प्रतिनिधि पंचायत स्तर के जन प्रतिनिधियों से ज़्यादा लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं...बातचीत के अंश... महिला आरक्षण बिल से ज्यादा बड़ी चुनौती तो ...
 कि पैसा बोलता है... 
क्रिकेट का ‘लीगकरण’ यानी काम करने की कॉरपोरेट शैली, ऊंची तनख्वाहें, और खेल के मैदान पर नाटकीय घटनाएं. मगर यही सब कुछ नहीं है. कॉरपोरेट शैली में खराब प्रदर्शन का मतलब है तुरंत सजा मिलना. पहली इंडियन प्रीमियर लीग के ...
 "ये मेरा सबसे ईमानदार काम है" 
नसीरुद्दीन शाह, अपने ज़िंदगी की कई दूसरी बातों के साथ ये भी बताते हुए कि हाल ही में भारत में रिलीज़ होने वाली पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिए’, उनकी अब तक की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म क्यों है? कई सालों तक मेरे ...
 अपना-अपना नजरिया 
न तो नैतिकता का आडंबर और न ही त्रासदी का विलाप. कोलकाता के मशहूर या यूं कहें कि बदनाम लालबत्ती इलाके सोनागाछी के यौनकर्मियों के साथ बिताये कुछ दिनों ने लेखक दिलीप डिसूजा और फोटोग्राफर टॉम पीट्रेसिक का उनके प्रति ...
 ‘लोकतंत्र का चमत्कार’ 
‘लोकतंत्र का चमत्कार’ यही वो शब्द हैं जो तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने तब कहे थे जब मायावती पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं. किसी राज्य की कमान संभालने वाली इस पहली दलित महिला ने पिछले ...
 अथक किंतु मर्यादित संघर्ष 
धनबल और बाहुबल के खिलाफ मध्यवर्ग की लड़ाई का प्रतीक बन चुकीं नीलम कटारा की मर्यादित लड़ाई का एक अध्याय आने वाली 14 मई को पूरा होने वाला है जब अदालत उनके बेटे नितिश की हत्या पर कोई फैसला सुनाएगी...मगर वे जानती हैं कि ...
 "इसे एकतरफा ही लागू कर सकते हैं" 
अपने भव्य फार्महाउस में राजनीतिक हलचलों के केंद्र में बैठे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का वनवास आज भी पूरा नहीं हुआ है। वो कोई चुनाव नहीं लड़ सकते और इसलिए प्रधानमंत्री भी नहीं बन सकते। मगर वो आज की पाकिस्तानी ...
 14 साल का 'गिल'वास 
14 साल बाद आखिरकार केपीएस गिल को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. 1994 में जून की एक दुपहरी को जब पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी गिल को भारतीय हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) की कमान सौंपी गई थी तो हम सभी ...
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